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Supreme Court New Judges 2026: 5 नए जज नियुक्त, जजों की संख्या हुई 37 — पूरी लिस्ट और इसका मतलब क्या है?

Supreme Court 5 new judges appointed 2026 —देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के बुनियादी ढांचे और न्याय प्रक्रिया को गति देने के लिए सोमवार को एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों (जजों) की नियुक्ति की अलग-अलग आधिकारिक अधिसूचनाएं जारी कर दी हैं। इन पांचों नए जजों के शपथ लेने और पदभार ग्रहण करने के बाद उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल संख्या औपचारिक रूप से बढ़कर 37 हो जाएगी। यह संख्या देश में हाल ही में बढ़ाई गई जजों की कुल स्वीकृत संख्या (38) से अब महज एक कम रह जाएगी।

कौन हैं ये पाँच नए जज?

ये पाँचों नाम देश के अलग-अलग उच्च न्यायालयों से आए हैं — हर एक का अपना समृद्ध न्यायिक अनुभव है:

वेंकिता सुब्रमणि मोहना — सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता।

न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर — बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश। देश की सबसे व्यस्त High Court में से एक का नेतृत्व करने का लंबा अनुभव।

न्यायमूर्ति शील नागू — पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश।

न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा — मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश।

न्यायमूर्ति अरुण पल्ली — जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश।

उनके शपथ लेने और पदभार ग्रहण करने के बाद उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या औपचारिक रूप से 37 हो जाएगी। सरकार ने पिछले महीने एक कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी किया था जिसके तहत भारत के प्रधान न्यायाधीश सहित शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई। न्यायालय में पहले से ही दो पद खाली थे।

34 से 38 — यह संख्या इतनी अहम क्यों है?

पिछले महीने सरकार ने एक अध्यादेश के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी थी। यह बदलाव इसलिए ज़रूरी था क्योंकि देश की सर्वोच्च अदालत में लाखों मुकदमे लंबित हैं और कम जजों के साथ न्याय की रफ्तार धीमी पड़ रही थी।

इससे पहले कोर्ट में दो पद पहले से खाली थे। अब 5 नई नियुक्तियों के बाद सिर्फ एक पद रिक्त रहेगा।

जितने ज़्यादा जज — उतनी ज़्यादा Benches — उतने ज़्यादा मामलों की सुनवाई — उतनी जल्दी न्याय। यह सीधा गणित है जो करोड़ों भारतीयों की ज़िंदगी पर असर डालता है।

 

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