NITI Aayog बैठक: PM Modi ने उद्यमिता, स्किल बढ़ाने और रोजगार पर CMs संग की चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन कल्चरल सेंटर में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता की। इस हाई-लेवल बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उप-राज्यपाल और प्रशासक, पदेन सदस्य के तौर पर केंद्रीय मंत्री और विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल हुए। नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) भी बैठक में मौजूद रहे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी बैठक में शामिल हुए। बैठक में कई मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया, जिनमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के हिमंत बिस्वा सरमा, बिहार के सम्राट चौधरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शामिल थे। हाल ही में चुने गए मुख्यमंत्री और नेता भी बैठक में मौजूद रहे, जिनमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन शामिल हैं।
नीति आयोग के एक बयान के अनुसार, इस साल की थीम विकसित भारत 2047 के लिए समावेशी मानव विकास है। यह थीम उम्र, क्षेत्र, लिंग या सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना सभी नागरिकों की भलाई और विकास पर ज़ोर देगी। इसके अलावा, पीएम मोदी देश भर में एंटरप्रेन्योरशिप (उद्यमिता) को बढ़ावा देने, स्किल बढ़ाने और टिकाऊ रोज़गार के मौके पैदा करने के उपायों पर चर्चा करेंगे।
प्रेस रिलीज़ के अनुसार, ‘समावेशी मानव विकास फ्रेमवर्क’ चार मुख्य स्तंभों पर आधारित है: बुनियादी मानव पूंजी और भविष्य के लिए ज़रूरी स्किल्स; उत्पादक रोज़गार, एंटरप्रेन्योरशिप और विकेंद्रीकृत विकास; स्वास्थ्य, पोषण और भलाई; और सभी के लिए समानता और सम्मान।चर्चाओं में मुख्य रूप से एक ‘इम्प्लीमेंटेशन रोडमैप’ (कार्यान्वयन की रूपरेखा) तैयार करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें गवर्नेंस, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), कन्वर्जेंस, पार्टनरशिप और डेटा-आधारित सिस्टम जैसे अहम साधनों का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही, शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग-टर्म नतीजों को ट्रैक करने के लिए एक व्यवस्थित तरीका भी अपनाया जाएगा, ताकि जवाबदेही तय हो सके और असर को मापा जा सके। एक खास ज़ोर राज्यों के विज़न को समावेशी मानव विकास के राष्ट्रीय विज़न के साथ जोड़ने पर होगा, ताकि समान और टिकाऊ विकास के लिए एक एकजुट और सहयोगी दृष्टिकोण को मज़बूत किया जा सके।


