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TMC rebel MPs NCPI NDA 2026-2023 में सिर्फ 822 वोट मिले थे जिस पार्टी को — आज TMC के 20 सांसद उसी में हुए शामिल! NCPI का चमत्कारी उदय

तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी लोकसभा सांसद 'नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी ऑफ़ इंडिया' (NCPI) में शामिल होने की तैयारी में

नई दिल्ली:TMC rebel MPs NCPI NDA 2026- भारतीय राजनीति में रविवार का दिन एक ऐसा नाटकीय मोड़ लेकर आया जिसकी शायद ही किसी ने कल्पना की होगी।

त्रिपुरा की एक छोटी सी पार्टी — नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) — जिसे 2023 के विधानसभा चुनाव में महज 822 वोट मिले थे, आज रातोंरात NDA की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन गई। और यह चमत्कार हुआ — तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी लोकसभा सांसदों की वजह से।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी की करारी हार के बाद जो राजनीतिक भूचाल की आशंका थी — वह आज हकीकत बन गई।तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सभी बागी सांसदों के एक और राजनीतिक दल, ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी ऑफ़ इंडिया’ (NCPI) में शामिल होने और केंद्र में BJP के नेतृत्व वाले ‘नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस’ (NDA) को समर्थन देने की संभावना है। यह जानकारी बागी TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने रविवार (14 जून) को दी।

इस घटनाक्रम के साथ, लोकसभा में अपनी संख्या के आधार पर ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी’ BJP के बाद NDA का दूसरा सबसे बड़ा घटक दल बन गई है। इसने TDP को पीछे छोड़ दिया है, जिसके 16 सांसद हैं।

कैसे हुआ यह सब? — घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन

रविवार को सबसे पहले बागी TMC सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में त्रिपुरा से BJP सांसद बिप्लब कुमार देब भी मौजूद थे — और यहीं NCPI में विलय का खाका तैयार हुआ।

इसके बाद 20 बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आवास पर पहुँचे और एक पत्र सौंपा — जिसमें सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की माँग की गई।

बागी खेमे की प्रमुख आवाज़ काकोली घोष दस्तीदार ने मीडिया के सामने ऐलान किया — “हम, AITC से चुने गए 20 सांसद, ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी’ में शामिल हो रहे हैं। हम PM मोदी के नेतृत्व में NDA के साथ काम करेंगे।”

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद दस्तीदार ने कहा, “हम, AITC से चुने गए 20 सांसद, अध्यक्ष से मिले और अलग बैठने का अनुरोध करते हुए एक पत्र सौंपा; ये बीस सांसद हमारी कुल संख्या का दो-तिहाई से अधिक हैं। हम ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी’ में शामिल हो रहे हैं। आगे बढ़ते हुए, हम देश के लिए काम करेंगे और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में NDA के साथ मिलकर काम करेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “चुने गए ये 20 सांसद पार्टी की कुल संख्या का दो-तिहाई से अधिक हैं। हम लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिले; हम PM मोदी के नेतृत्व में NDA के साथ काम करेंगे।”वहीं, सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा, “हम ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी’ में शामिल हुए हैं; यह एक राजनीतिक दल है, एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दल है। असली TMC कौन है, यह अदालत में तय होगा।”

काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लगभग 20 बागी सांसद ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी ऑफ़ इंडिया’ (NCPI) में शामिल होने जा रहे हैं। यह त्रिपुरा का एक कम जाना-माना राजनीतिक दल है, जिसने 2023 के विधानसभा चुनावों में केवल 822 वोट हासिल किए थे।

सबसे बड़ा चौंकाने वाला तथ्य — NCPI का असली इतिहास

यहाँ एक ऐसा तथ्य है जो इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना देता है।

NCPI — जिसमें आज 20 लोकसभा सांसद शामिल हुए — 2022 में स्थापित एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है। 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इसने 2 सीटों पर चुनाव लड़ा — और कुल 822 वोट पाए, जो कुल मतों का महज 0.03% था। 2024 का लोकसभा चुनाव इस पार्टी ने लड़ा ही नहीं।

आज वही पार्टी लोकसभा में 20 सांसदों के साथ TDP (16 सांसद) को पछाड़कर NDA की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी बन गई।

2022 में स्थापित NCPI एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। इसने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में दो सीटों पर चुनाव लड़ा था और उन निर्वाचन क्षेत्रों में डाले गए कुल वोटों का केवल 0.03 प्रतिशत हासिल किया था। यह घटनाक्रम तब हुआ है जब बागी सांसद तृणमूल कांग्रेस से अलग होने के बाद एक नई राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। NCPI ने 2024 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था।

नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी की मौजूदगी असम, त्रिपुरा, बंगाल, पूर्वोत्तर और अन्य क्षेत्रों में है। पार्टी ने पहले त्रिपुरा में चुनाव लड़ा है। 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों के दौरान, जहांगीर अली ने उनाकोटी जिले के कैलाशहर निर्वाचन क्षेत्र से नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था।

सुदीप बंद्योपाध्याय की एंट्री — सबसे बड़ा झटका

इस बगावत में सबसे चौंकाने वाला नाम है सुदीप बंद्योपाध्याय — जिन्हें ममता बनर्जी के सबसे करीबी और विश्वासपात्र नेताओं में गिना जाता था। वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भूपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद बागी खेमे में शामिल हुए।

बंद्योपाध्याय ने कहा — “असली TMC कौन है — यह अदालत तय करेगी।” यह बयान इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर कानूनी लड़ाई भी होगी।

लोकसभा अध्यक्ष से मिलने से पहले बागी सांसदों ने भूपेंद्र यादव से मुलाकात की

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित विलय के बारे में तब चर्चा हुई जब बागी TMC सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ बैठक की। सूत्रों ने यह भी दावा किया कि बैठक के दौरान त्रिपुरा से BJP सांसद बिप्लब कुमार देब भी मौजूद थे, जहां विलय के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया गया।

बागी TMC सांसदों ने दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात की और पार्टी में विभाजन के बीच सदन में बैठने की अलग व्यवस्था की मांग की।

20 बागी सांसदों की पूरी लिस्ट

काकोली घोष दस्तीदार, सताब्दी रॉय, बापी हलदर, शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार मल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष, खलीलुर्रहमान, अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान, मिताली बैग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया, पार्थ भौमिक और सुदीप बंद्योपाध्याय।

और बागियों का दावा है कि 2 और सांसद जल्द शामिल होंगे — जिससे संख्या 22 हो जाएगी।

 

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